रायपुर : दो पुलिसकर्मी और एक पत्रकार को EOW की धौंस दिखाकर वसूली के मामले में गिरफ्तार किया गया है. ये सभी पहले तो अधिकारियों से जुड़ी शिकायतों और प्रकरणों की जानकारी जुटाते और फिर फोन कर उनसे वसूली करते थे. ACB-EOW चीफ आरिफ शेख के पास पहुंची इस शिकायत के बाद इस रैकेट का पर्दाफाश किया गया है. आज प्रेस कांफ्रेंस कर आरिफ शेख ने इस पूरे मामले का खुलासा किया है.
दरअसल पिछले कई दिनों से इस बात की शिकायत ACB-EOW चीफ को मिल रही थी कि कुछ लोग एसीबी-EOW की धौंस दिखाकर और प्रकरण खात्मा करा देने का झांसा देकर अफसरों से वसूली कर रहे थे.
इस शिकायत के बाद एसीबी चीफ ने एसपी पंकज चंद्रा, एएसपी महेश्वर नाग की अगुवाई में टीम गठित कर इस शिकायत की जांच के निर्देश दिये. जब इन सभी के कॉल सर्विलांस पर डाले गये तो इनकी सच्चाई उजागर हो गयी, वहीं पीड़ित लोगों की शिकायतों की जांच में राज सामने आ गया, जिसके बाद इन सभी के खिलाफ कार्रवाई की गयी है. एसीबी की टीम ने इस मामले में बर्खास्त सब इंस्पेक्टर सत्येंद्र सिंह वर्मा, EOW का पूर्व ASI विनोद वर्मा और एक RTI एक्टिविस्ट व कथित पत्रकार राजेश तराटे को गिरफ्तार किया गया है. एसीबी-ईओडब्ल्यू के नाम पर वसूली करने वालों के खिलाफ ये अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई है.
पटवारी को धमकाता था बर्खास्त SI सत्येंद्र सिंह...
भाटापारा का रहने वाले सत्येंद्र सिंह वर्मा पुलिस विभाग में ही पदस्थ था, लेकिन ऐसी ही रिश्वतखोरी के मामले में जेल जाने के बाद उसे पुलिस विभाग ने बर्खास्त कर दिया गया था. बर्खास्तगी के बाद भी सत्येंद्र अपनी हरकतों से बाज नहीं आया, वो अब ईओडब्ल्यू और एसीबी के नाम पर वसूली का धंधा चालू कर दिया. बलौदाबाजार के एक पटवारी को उसके झांसा दिया कि एसीबी में चल रहा उसका मामला वो खत्म करा सकता है, जिसके लिए उसे 5 लाख रुपये देने होंगे. पटवारी को फर्जीवाड़े का अहसास हुआ, तो उसने इस प्रकरण की शिकायत एसीबी मुख्यालय और पुलिस थाने में की थी.
सस्पेंड ASI विनोद वर्मा ने फारेस्ट अफसर से मांगे थे 10 लाख...
फर्जीवाडे की ऐसी गतिविधियों में शामिल होने की वजह से ASI विनोद वर्मा सस्पेंड किया जा चुका था, लेकिन कार्रवाई के बाद भी वो करतूतों से बाज नहीं आ रहा था. वन विभाग के एक अफसर को विनोद वर्मा ने धमकी दी थी कि उसके खिलाफ एसीबी में गंभीर शिकायतें दर्ज है, उसे किसी भी दिन जेल भेजा जा सकता है. अगर गिरफ्तारी से बचना है तो 10 लाख रुपये तुरंत दो. इस दौरान विनोद खुद को EOW का कर्मचारी बताता रहा.
वन विभाग के कर्मचारियों से वसूली करता था कथित पत्रकार राजेश...
खुद को पत्रकार और आरटीआई एक्टिविस्ट बताने वाले राजेश तराटे के खिलाफ ये शिकायत मिली थी कि वो वन विभाग के अधिकारियों-कर्मचारियों से वसूली करता था. आरटीआई एक्टिविस्ट के नाम से पहले राजेश सूचना के अधिकार के नाम पर जानकारी जुटाता था और फिर एसीबी-ईओडब्ल्यू में शिकायत दर्ज कराने की धमकी देकर हजारों-लाखों की वसूली करता था. इस दौरान वो एसीबी चीफ आरिफ शेख और एसपी पंकज चंद्रा से रिश्ते होने का झांसा भी देता था. इसके खिलाफ रायपुर के सिविल लाइन थाने में मामला दर्ज कराया गया था. कई लोगों से उसके 10 हजार 15 हजार की वसूली भी की थी. सिविल लाइन पुलिस की तरफ से उसकी गिरफ्तारी की गयी है.

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