रायपुर : रायपुर केंद्रीय जेल में मानसिक स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया गया जिसमें बंदियों की काउंसलिंग की गयी। यह सब हाल ही में जेल में लाये गए थे।
स्पर्श क्लीनिक के मनोचिकित्सक डॉ.अविनाश शुक्ला ने बताया शिविर में 41 बंदियों का परामर्श किया गया जो सभी पुरुष हैं।
अक्सर जेल में जाने पर लोगों की मानसिक स्थिति में बदलाव आता है। लोगों में आत्म ग्लानि और समाज में उन के लियें लोग क्या सोच रहे होंगे, यह सब उनके लिए मानसिक तनाव का कारण होते है। यह शिविर जिला मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत लगाया गया था।
बंदियोंमें ज़्यादातर नशे के आदि होते हैं जैसे शराब और गुटखा, और अक्सर नशा न मिलने पर खुद को और दूसरों को चोट पहुँचाने की कोशिश करते हैं याफिर बहुत हिंसक हो जाते हैं जिसके लियें उनको काउंसलिंग या दवाई की जरुरत होती है।
अधिक गुस्सा आना और डिप्रेशन होना भी जेल में रहने वाले बंदियों में एक आम सी बात है। नींद की समस्या, कुंठा में रहना बुरे ख्याल आना और समाज में वापस जाने पर क्या होगा जैसी सोच की समस्या को दूर करने के लियें परामर्श किया गया और मन में चल रही उथल- पुथल को भी समझ कर काउंसलिंग की गई।
साइकोलॉजिस्ट ममता गिरी गोस्वामी ने बताया बंदियों में ज्यादातर लोग तनाव के कारण डिप्रेशन में रहते है ।तनाव से मुक्ति के लिये प्रतिदिन नियमित रुप से योग करने भरपूर नींद लेने आपस में बातचीत कर तनाव को कम करने की सलाह दी जाती है।
काउंसलिंग के दौरान कई बंदियों को कोविड-19 को लेकर भी तनाव है। उनको परामर्श के दौरान बताया गया कि उचित शारीरिक दूरी फेस मास्क और नियमित रूप से हाथों की साफ सफाई रखने, गंदे हाथों को आंखों में लगाने, मुंह में लगाने, और खाना खाने से बचना है। किसी भी सार्वजनिक वस्तु को छूने के बाद हाथ को कम से कम 20 सेकेंड तक अच्छे से साबुन से धोना ही वर्तमान समय में कोविड-19 का कारगर बचाव है।

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