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तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोगन ने तुर्की का नाम बदला...अब इस नए नाम से जाना जाएगा तुर्की...


ब्युरो रिपोर्ट : तुर्की के राष्ट्रपति और खुद को दुनिया में इस्लाम का सबसे बड़ा पैरोकार बताने वाले रेचप तैयप एर्दोगन (Recep Tayyip Erdogan) ने अपने देश तुर्की का नाम बदल दिया है। अब तुर्की को तुर्किये (Turkey as Turkiye) के नाम से जाना जाएगा। ऐसे में अब सभी तरह के व्यापार, अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं और राजनयिक कार्यों के लिए तुर्की की जगह तुर्किये का इस्तेमाल किया जाएगा। इस महीने की शुरुआत में राष्ट्रपति एर्दोगन ने एक बयान जारी कर कहा था कि उन्होंने देश के अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त नाम को “तुर्की” से तुर्किये में बदल दिया है। उन्होंने यह भी बताया था कि तुर्किये शब्द तुर्की राष्ट्र की संस्कृति, सभ्यता और मूल्यों को बेहतरीन तरीके से दर्शाता है और व्यक्त करता है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि आखिर तुर्की के नाम को क्यों बदला गया है।

विशेषज्ञ बताते हैं कि किसी भी देश के नाम को बदला कोई असामान्य बात नहीं है। नाम परिवर्तन राष्ट्र की ब्रांडिंग से जुड़ी बात होती है। चाहें किसी देश को अपने ऊपर लगे ठप्पे को हटाना हो, अधिक सकारात्मक छवि पेश करना हो या राजनीति रूप से फायदा पाना हो। इनमें से किसी भी कारणों से देश के नाम को बदलना आम बात है। हाल के दिनों में कई देशों के अंदर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खुद को बढ़ावा देने की मांग उठती रही है। लोगों का कहना है कि नाम के कारण दुनिया उन्हें और उनकी विशिष्ट पहचान को देखती है। यही कारण है कि हाल के वर्षों में कई देशों, राज्यों और शहरों ने अपने नाम को बदला है।

हाल ही में, नीदरलैंड ने दुनिया में अपनी छवि को आसान बनाने के लिए “हॉलैंड” नाम को हटा दिया। उससे पहले, “मैसेडोनिया” ने ग्रीस के साथ एक राजनीतिक विवाद के कारण नाम बदलकर उत्तरी मैसेडोनिया कर दिया था। 1935 में ईरान ने अपना नाम फारस से बदल लिया था। पश्चिमी देशों में फारस शब्द का इस्तेमाल किया जाता था। फारसी में ईरान का अर्थ पर्शियन है। उस समय यह महसूस किया गया था कि देश को स्थानीय रूप से इस्तेमाल किए जाने वाले नाम से ही पुकारना चाहिए, न कि ऐसा नाम जो बाहर के लोग जानते हैं।

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