ब्युरो रिपोर्ट : इंसान के अंदर अच्छाई जो होती है वो एक दिखावा नहीं होती, जब-जब वक्त आता है तो इंसान की अच्छाई खुद ब खुद सामने आ जाती है। आज आपको हम ऐसे ही एक शख्श के बारे में बताने जा रहे हैं। ये भी एक आदमी की तरह आम शख्श हैं, जो लन्दन की सबसे बड़ी मस्जिद में इमाम हैं और वहीं पर नमाज़ पढ़ाते हैं। जिन्हें उनकी अच्छाई के लिए ऑर्डर ऑफ द ब्रिटिश एंपायर जैसे सम्मान से नवाजा गया है। असल में हुआ कुछ ऐसा था कि जून 2017 में जब उत्तरी लन्दन में फिसबरी पार्क में एक शख्श ने जिसका नाम डैरेन ओसबोर्न था, डैरेन ने मुस्लिम वेलफेयर हाउस के एंट्री द्वार पर फुट पाथ पर पैदल चलने वाले मुस्लिम लोगों की भीड़ पर गाड़ी चढ़ा दी। जब लोगो ने डेरेन की इस कायरता भरी हरकत को देखा तो सभी के अंदर गुस्सा भर गया और सभी ने उसका पीछा किया और उसे घेर लिया चारों तरफ से लोगों ने उसे घेर कर मारने के लिए आगे बढ़े। हमलावर जब भागने को हुआ तो भीड़ ने उसे घेर लिया। ऐन इसी वक्त पर इमाम शेख मुहम्मद महमूद आ गए।
डैरेन उनके पीछे था। इमाम भीड़ के सामने आ गए और कानून हाथ में न लेने और कायराना हरकत के जवाब में कायरता न दिखाने की दख्वास्त की। जबकि भीड़ गुस्से में थी। फिर भी वे तब तक भीड़ के सामने खड़े रहे, जब तक पुलिस नहीं आ गई। इस हमले में 51 वर्षीय मकरम अली की हत्या और नौ लोगों के घायल होने का दोषी पाए जाने पर फरवरी 2018 में डैरेन ओसबोर्न को 43 साल की सजा दी गई। एक इंटरव्यू में इमाम महमूद ने कहा कि मुझे हीरो जैसे तमगा शोभा नहीं देता, मेरा ख्याल है कि उस वक्त जो किया वह कोई असाधारण बात नहीं है। डैरेन की जान बचाने के लिए यह स्वाभाविक प्रतिक्रिया थी। कायरतापूर्वक हमले के जवाब में कायरता दिखाना जायज नहीं है।
36 साल के इमाम शेख मुहम्मद महमूद मिस्र के अज़हरी संस्थान से दीक्षित हैं और फिलहाल लंदन की सबसे बड़ी मस्जिद के इमाम हैं। जन्म मिस्र के काहिरा में हुआ था। उनका परिवार 1986 में लंदन चला गया, जब वह छह सप्ताह के थे। उन्होंने यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन में जीव विज्ञान का अध्ययन किया और 2012 में अपनी पत्नी और दो बच्चों के साथ कुछ समय के लिए काहिरा चले गए। फिर वे नौ महीने बाद लंदन लौट आए क्योंकि उन्हें लगा कि देश शैक्षणिक जरूरतों के लिए उपयुक्त नहीं है। बाद में उन्होंने बर्मिंघम स्थित यूरोपीय मानव विज्ञान संस्थान में इस्लामी धर्मशास्त्र का अध्ययन किया। फिर वह 2013 में मुस्लिम वेलफेयर हाउस के इमाम बने।
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