स्कूल शिक्षा विभाग की नाकाम दावेदारी...
सामाजिक भवनों में पूरा होता शासकीय दायित्व...
जान जोखिम में डाल नहीं पढ़ना साहाब...
फिंगेश्वर, गरियाबंद : लगातार शासकीय स्कूलों की इमारतों और शैक्षणिक व्यवस्थाओं पर ख़बर प्रकाशन और कुंभकर्णीय नींद से शासन-प्रशासन को जगाने की मुहिम के इस कड़ी में आप जानेगें की कैसे शासकीय दायित्व को विशेष समाज के सरोकार से पूरा किया जा रहा है। जहाँ छत्तीसगढ़ स्कूल शिक्षा विभाग बच्चों को बेहतर और उच्च-गुणवत्ता वाली शिक्षा उपलब्ध कराने का दावा कर रहा है, वहीं दूसरी ओर इन दावों की पोल छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिला अंतर्गत फिंगेश्वर ब्लॉक के शासकीय प्राथमिक विद्यालयों में खुलती दिख रही है। यहाँ देश के नौनिहालों का भविष्य वृद्ध तड़कती-टपकती छत और जर्जर दीवारों के बीच गढ़ा जा रहा है।
ब्लॉक मुख्यालय के ग्राम पंचायत बोड़की के आश्रित ग्राम जोगीडीपा के दशकों पुराने शासकीय प्राथमिक शाला भवन की हालात को देख शिक्षक खुद बच्चों को बनाये गए शिक्षा के मंदिर से दूर रखने को मजबूर हैं। शासकीय शाला भवन की हालात को देख पालक अपने बच्चों को स्कूल भेजने से कतराने लगे हैं। बच्चों की टीसी निकालकर प्राईवेट स्कूलों में एडमिशन करवाते हैं। वहीं बचे हुए कुछ बच्चे जर्जर स्कूल भवन के कारण सामाजिक भवनों में पढ़ाई करने को मजबूर हैं।
प्राथमिक शाला के मुख्य भवन में पिछले 4 सालों से ताला लटक रहा है और विद्यालय के सामने बने गाँव के सामुदायिक भवन, साहू समाज का भवन और शाला के अतिरिक्त कक्ष में अब पूरा विद्यालय संचालित हो रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि नए स्कूल भवन की मांग को लेकर क्षेत्रीय विधायक, एसडीएम, ब्लॉक शिक्षा अधिकारी, जिला शिक्षा अधिकारी एवं कलेक्टर को ज्ञापन सौंप चुके हैं, फिर भी प्रशासन ध्यान नहीं दे रहा है। शायद बड़ी दुघर्टना का इंतजार है।
विद्यालय के एक शिक्षक नंद कुमार जोशी ने बताया कि कई बार BEO साहब के खानापूर्ती निरीक्षण के बाद भी अब तक मौन धारण किया हुआ है, जिस वजह से अब विद्यार्थियों को दूसरे भवनों में पढ़ाने की नौबत आ गई है। जोगीडीपा स्थित इस स्कूल में अब भी काफी संख्या में बच्चे पढ़ने के लिए आते हैं और विद्यालय भवन की हालत पूरी तरह जर्जर हो चुकी है, बावजूद इसके शिक्षा विभाग द्वारा बच्चों की सूचना लेते हुए इस विद्यालय भवन को भी भगवान भरोसे छोड़ दिया गया है। देखना यह होगा कि अब आगे जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग कब तक और कैसे व्यवस्थाओं को दुरुस्त करता है।
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