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किसके संरक्षण में पत्रकार पर जानलेवा हमला करने वाले तस्कर घूम रहे आजाद...

  • पत्रकारों पर हमलों को लेकर गंभीरता बरतने के शासन के सख्त निर्देशों के बावजूद 11 दिन पूर्व पत्रकार को कवरेज के दौरान हत्या का प्रयास करने वालों तक नहीं पहुंच पा रहे पुलिस के हाथ...
  • पोलिस ने एक तरफ आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पीड़ित को दिया आश्वासन, दूसरी तरफ गांव-गांव घूम रहे आरोपी...
  • 30 से ज्यादा हमलावरों में तथाकथित इमरान अली भाजपा का छुटबहिया नेता है तस्करों का सरगना...
  • गरियाबंद उच्चाधिकारियों के संज्ञान के बाद छुरा पुलिस ने अब तक किसी की नहीं की गिरफ्तारी...

गरियबंद : पत्रकारों पर हो रहे हमलों को लेकर शासन ने भले ही गंभीरता बरतने के सख्त निर्देश दे रखे हों लेकिन इसको धरातल पर अमली जामा पहनाने में विफलता ही नजर आ रही है। अपराध पर अंकुश लगाने के दावों की पोल उस वक्त खुल जाती है जब सरेआम पत्रकार पर जानलेवा हमला होता है। इसके बावजूद पुलिस मुकदमा तो शिफारिशों के करम से दर्ज कर लेती है लेकिन आरोपियों को अभयदान दे देती है। जिसके परिणामस्वरुप आरोपी खुलेआम घूमते रहते हैं और पीड़ित पत्रकार पर उल्टा झूठा-फर्जी आरोप और शिकायत करते हैं। इसलिए पत्रकार को प्रदेश स्तरीय पुलिस अधिकारियों या विशेष संगठनों से न्याय की गुहार लगानी पड़ती है जिसके बाद भी पुलिस बमुश्किल एक आरोपी को भी गिरफ्तार नहीं कर पाती है जबकि अन्य आरोपी भी खुलेआम गांव-नगर-शहर में ही घूम रहे हैं। पत्रकार हमले के मुख्य सड्यंत्रकारियों, हमलावरों और धमकी देने वालों में इमरान अलि गांव-गांव और इशू जोशी अपने बिडगार्ड की नौकरी में खुलेआम पूरे दिन घूम-फीर कर पुलिस के दावों की पोल खोल रहा है। पत्रकार द्वारा पुलिस अधीक्षक समेत गरियाबंद के उच्चाधिकारियों से हमलावरों को राजनीतिककी मिली-भगत का आरोप लगाया है जो फरार हमलावर इमरान अलि और इशू जोशी के साथ पूरे तस्कर गैंग की आज़ादी से प्रमाणित भी हो रहा है।


जिले में पहले भी की गयी है पत्रकार की हत्या...

विदित हो छत्तीसगढ़ के गरियाबंद के पत्रकार उमेश राजपूत हत्याकांड की जांच कर रही सीबीआई ने घटना के साढ़े पांच साल बाद दो संदिग्धों को हिरासत में लिया था। दोनों छुरा के रहने वाले थे, इनमें से एक पत्रकार था। मामले में संगीन धाराओं में मुकदमा भी दर्ज हुआ था लेकिन गिरफ्तारी करने में पुलिस ने हीलाहवाली बरती। सीबीआई के हस्तक्षेप के बाद दो की गिरफ्तारी हुई तो। लेकिन पुलिस के मजबूरियों का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि एक तरफ पुलिस आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए दबिश देने की बात करती है तो वहीं दूसरी तरफ आरोपी शहर में खुलेआम घूमते रहते हैं।

 

क्या था मामला ?

विगत 10 जून को जिले के वन परिक्षेत्र छुरा अंतर्गत चरौदा बिड में जहां बड़ी संख्या में इमारती पेड़ बीजा की बेदम कटाई की कवरेज करने जंगल में पत्रकार परमेश्वर कुमार साहू और शहरयार खान पहुंचे तो बिटगॉर्ड द्वारा सुनियोजित तरीके से 30-40 की संख्या में आसामाजिक तत्वों और लकड़ी तस्करों को बुलाकर जानलेवा हमला करवाया गया था। इतना ही नहीं, दोनों पत्रकारों के मोबाइल को पूर्ण रूप से तोड़कर सारे सबूत मिटाने का भी कार्य किया गया। बिटगार्ड इशू जोशी द्वारा षड्यंत्र कर जंगल में पत्रकारों के ऊपर हमला करवा कर लोक तंत्र के चौथे आधार स्तंभ पर आघात पहुंचाने का सबूत जिस मोबाइल में मौजूद था, षड्यंत्रपूर्वक हमला कर कई टुकड़ों में तोड़ दिया गया था। दोनों पत्रकारों ने हमले के बाद मौका स्थल से बड़ी मुशकिल से भागकर अपनी जान बचाई थी और सीधे छुरा थाना पहुंचकर लिखित शिकायत आवेदन दिया था।


सिर्फ एफआईआर दर्जकर कर ली इतिश्री...

पुलिस ने उक्त मामले में 147, 294, 323, 506 समेत 427 धाराओं में मुकदमा तो दर्ज कर लिया था लेकिन घटना के 5 दिन बाद भी पुलिस एक भी गिरफ्तारी न कर सकी है। उधर जानलेवा हमले का षड्यंत्ररचैता विभागीय तस्कर इशू जोशी मुख्य हमलावर तथाकथित स्वयं को भाजपा का नेता बताने वाला इमरान अलि अन्य तस्करों के साथ मिल कर उल्टा पीड़ित पत्रकारों के साथ हुए मार-पीट और धमकाने के लिए बनाए गए नशीले पदार्थों के फर्जी वीडियो को धड़ल्ले से शोशल मीडिया में वायरल कर छवि धूमिल करने की कोशिश कर रहे हैं। वहीं बिडगार्ड अपनी पोल खुलने की डर से पीड़ित को उलझाने अजाक थाना में घटना के लगभग दो दिनों के बाद जाती सूचक गाली-गलौज की शिकायत की है। पोलिस जाँच को प्रभावित करने की इन हरकतों के बाद पीड़ित पत्रकारों ने प्रदेश के मानव अधिकार आयोग और महिला आयोग के समक्ष अपनी समस्या रखी है।

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