गरियाबंद : जिले में इस बार मलबरी के 32 हजार 670 पौधरोपण किया गया है। जो मलबरी कोया उत्पादन में सहयोगी है। रेशम विभाग के सहायक संचालक एस.के. कोल्हेकर ने बताया कि कलेक्टर छतर सिंह डेहरे एवं जिला पंचायत सीईओ विनय लंगेह के मार्गदर्शन में मनरेगा योजना के तहत रेशम केन्द्र लोहरसी एवं रेशम केन्द्र कौंदकेरा में मलबरी के 32 हजार 670 पौधे रोपित किए गए हैं। इससे वर्ष 2020-21 दौरान स्थानीय स्तर पर लोगों को अभी तक 680 मानव दिवस का रोजगार उपलब्ध भी हुआ है। ज्ञात है कि मलबरी के पौधों की पत्तियां मलबरी रेशम कीट का मुख्य आहार हैं। रेशम कीट 25 से 30 दिन तक पत्ती खाकर कोसा बनाता हैं। वर्ष में इसकी 04-05 फसल ली जाती है, जिनका कटाई-छटाई और साफ-सफाई में स्थानीय कोसा विकास स्व-सहायता समूह के सदस्यों को वर्ष भर रोजगार मिल जाता है। केन्द्र प्रभारी एवं वरिष्ठ रेशम निरीक्षक मनहरण चन्द्राकर एवं स्थानीय कोसा विकास स्व सहायता समूह के माध्यम से रेशम कार्य की गतिविधियों के सुचारू संचालन में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।
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