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शर्मनाक घटना गरियाबंद : वन अमला ने कराया पत्रकारों पर जंगल में जानलेवा हमला...छुरा वन परिक्षेत्र के चरौदा बिड में बेशकीमती इमारती पेड़ बीजा की बड़े पैमाने पर बेदम कटाई...कवरेज के दौरान हुआ जंगल में हमला...

छुरा थाना में हुई लिखित शिकायत...पत्रकारों के ऊपर हमला करने वालों के ऊपर हुआ विभिन्न धाराओं में अपराध दर्ज...

दो पत्रकारों पर जंगल में 30- 40 लोगो ने घायल होते तक किया हमला, पत्रकारों ने की घटना कि कड़ी निंदा...


जिले में पहले भी हो चुकी है पत्रकार की हत्या, आरोपी अबतक पकड़ से बाहर...

गरियाबंद, छत्तीसगढ़ : जिले का छुरा ब्लॉक पत्रकारों के लिए नासूर बन गया है। जहां पत्रकारों की स्वतंत्रता पर ही सवाल खड़े कर दिए गए हैं। जब भी कोई मामले पर खबर कवरेज किया जाता है, तो धमकी और केवल हमले देखने को मिलते हैं। जिसका कई ताजा उदाहरण देखने को मिला है। खासकर छुरा थाना क्षेत्र और इस ब्लॉक में इस तरह की घटना आए दिन देखने को मिलती रहती है। ऐसे ही मामलों को उजागर करने वाले निर्भीक पत्रकार उमेश राजपूत को लोकतंत्र की रक्षा के लिए शहीद होना पड़ा था। जिसके आरोपी आज तक पकड़ से बाहर है। एक तरफ भूपेश सरकार द्वारा पत्रकार सुरक्षा कानून लागू करने की जतन की जा रही है और दूसरी ओर पत्रकारों के ऊपर हमला होना एक शर्मनाक घटना है।

ताजा मामला जिले के वन परिक्षेत्र छुरा अंतर्गत चरौदा बिड का है जहां बड़ी संख्या में इमारती पेड़ बीजा की बेदम कटाई कोई नई बात नहीं है। विभाग के जिम्मेदार बिडगार्ड और डिप्टी रेंजर के सह पर ही जंगल का उजाड़ लगातार जारी है। जब मामले की कवरेज करने जंगल में पत्रकार परमेश्वर कुमार साहू और शहरयार खान पहुंचे तो बिटगॉर्ड द्वारा सुनियोजित तरीके से 30-40 की संख्या में आसामाजिक तत्वों और लकड़ी तस्करों को बुलाकर जानलेवा हमला करवा गया। इतना ही नहीं, दोनो पत्रकारों के मोबाइल को पूर्ण रूप से तोड़कर सारे सबूत मिटाने का भी कार्य किया गया है। जिसमें बिटगार्ड इशू जोशी द्वारा षड्यंत्र कर जंगल में पत्रकारों के ऊपर हमला करवा कर लोक तंत्र के चौथे आधार स्तंभ पर आघात पहुंचाने का सबूत मौजूद था, जिसका डेटा बैकअप करने के लिए रायपुर सर्विस सेंटर में दिया गया है। दोनो पत्रकारों ने हमले के बाद मौका स्थल से बड़ी मुशकिल से भागकर अपनी जान बचाई और सीधे छुरा थाना पहुंचकर लिखित शिकायत आवेदन दिया। वहीं इस विडम्बणीय घटना को लेकर कई पत्रकारों ने खेद भी व्यक्त किया है।

कवरेज के दौरान प्राणघातक हमला...वीडियो सोशल मीडिया में वायरल...एसपी ने लिया तत्काल एक्शन...
बता दें कि जंगल में इमारती पेड़ों की अवैध कटाई चरौदा सर्कल में जमकर हो रही है। जिसमें विभाग के जिम्मेदार बिडगार्ड ईशु जोशी और डिप्टी रेंजर मोहन यदु का लकड़ी तस्करों को खुला संरक्षण है। जिसकी खबर कवरेज करने गए पत्रकारों पर विभाग के जिम्मेदारों ने अपनी पोल खुलने के डर से असामाजिक तत्वों और  लकड़ी तस्करों को जंगल में बुलाकर जानलेवा हमला करवाकर मोबाइल सहित बाइक को तोड़फोड़ किया।जिससे पत्रकारों को गंभीर चोटें आई हैं। मिनटों तक गमछे से गला को दबा कर तब तक रखा जब तक पत्रकार शहरयार खान बेहोश न हुआ साथ ही पत्रकार परमेश्वर साहू को अमानवता पूर्वक मारते-पीटते हुए जान से मारने की धमकी दी गई और बाइक में नशीले पदार्थों को रखकर छबि धूमिल करने वीडियो बनाया और कहा की अगर थाने में शिकायत किया तो ये वीडियो पूरे सोशल मीडिया में वायरल कर देंगे। जिसकी लिखित शिकायत छुरा थाना में करने पर पत्रकारों का डॉक्टरी मुलाहिजा करवाया गया। जिसके बाद गरियाबंद पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर छुरा थाना प्रभारी भूषण चंद्राकर ने विभिन्न धाराओं में 5 से अधिक लोगों पर एफआईआर दर्ज कर विवेचना में लिया है।

महिला पत्रकार को सामूहिक बलात्कार की धमकी...
आपको बता दें की बिडगार्ड द्वारा सुनियोजित तरीके से पहले तो तस्करों को साथ लेकर जंगल में पत्रकारों पर हमला करवाया फिर उसके बाद बंधक बनाकर गांव ले गए। जबकी दोनो पत्रकार घायल अवस्था में थे, वहां ले जाकर भी प्रताड़ित किया गया और अमानवता पूर्वक सरेआम मारपीट कर महिला पत्रकार के बारे में अभद्र व्यवहार करते हुए कहने लगे की अगर आज वो आई होती या फिर कहीं पर मिली तो हम सब लोग उसका सामूहिक बलात्कार करेंगे, जिसके बाद सब ने मिल कर ठहाके लगाए। जिससे महिला पत्रकार के ऊपर भी कभी भी कुछ भी अप्रिय घटना मंडरा रही है। वहीं घटना का वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है। जिसमें साफ तौर पर देखा जा सकता है की मानवता को शर्मसार करते हुए कैसे 30 से 40 लोग दो पत्रकारों को जंगल में घेरकर ताबड़तोड़ हमला कर मारपीट कर रहे हैं। जिसकी शिकायत महिला आयोग रायपुर और मानवाधिकार आयोग में भी की गयी है।

सुनियोजित तरीके से हुआ पत्रकारों पर हमला...
जब मीडियाकर्मी उक्त क्षेत्र के जंगल में पड़ताल करने पहुंचे और उसकी जानकारी डिप्टी रेंजर मोहन यदु को दिया तो उन्होंने बिटगार्ड ईशु जोशी को मौके पर भेजने की बात कही। जहां पत्रकारों के ऊपर हमला करने योजाना पूर्ण रूप से तैयार हो गयी। कुछ समझ पाते उससे पहले ही हमला कर मोबाइल को तोड़ दिया गया जिससे सारे सबूत मिटा दिए जाए। क्योंकि उक्त मोबाइल से सारे वीडियो फोटो के माध्यम से सबूत संकलन किया गया था।

हमले का वीडियो सोशल मीडिया में हो रहा है वायरल...किसी भी ने नहीं दिखायी मानवता...
पहले तो मारपीट कर व कुछ नशीले पदार्थो को हमलवारों द्वारा  बाइक में रखकर वीडियो बनाया गया।फिर उसे सोशल वीडियो में वायरल किया गया। लेकिन मानवता को शर्मसार करते हुए और कानून के विरुद्ध जाकर जानलेवा हमला करते हुए मारपीट पर किसी भी जनप्रतिनिधियों, समाजसेवी व अन्य सामाजिक संगठनों ने किसी भी प्रकार से संवेदना नहीं दिखाई। जबकि सोशल मीडिया में वायरल हो रहे वीडियो में साफ दिख रहा है की जंगल में दो लोगों पर 30-40 लोग किस तरह से ताबड़तोड़ कहर बरपा रहे हैं।

लकड़ी से भरे ट्रेक्टर पर कुछ माह पहले हुआ था कार्यवाही...क्या इसी का बौखलाहट तो नही?
आपको बता दें की बीते कुछ माह पहले परिक्षेत्र के चरौदा सर्कल में लकड़ी से भरे ट्रेक्टर को पत्रकारों की सूचना पर रेंजर द्वारा जब्ती की कार्यवाही की गई थी।जिसमें बिटगार्ड का उक्त लकड़ी तस्करों और अवैध कटाई कर जंगलों का उजाड़ करने वालों को संरक्षण दिया जाता रहा है, जिसकी कई बार पुष्टि हो चुकी है। क्षेत्र के तस्कर बीजा लकड़ी की कटाई कर बिटगार्ड के सह पर दूर दूर तक इसकी तस्करी करते हैं। जिसका कमीशन बिटगार्ड और जिम्मेदार अधिकारियों को भी मिल जाता है। जिसके चलते और ट्रेक्टर पर कार्यवाही के कारण बौखलाए तस्करों ने पत्रकारों पर हमला किया।जिसके षड्यंत्रकारी वन अमला है जो साफ जाहिर है।

पत्रकारों की सुरक्षा पर उठने लगा है सवाल...??? 
राज्य सहित जिले में आए दिन इस तरह की घटना देखने या सुनने को मिलती रहती है। गरियाबंद जिले में पत्रकारों की स्वतंत्रता का खुलेआम हनन हो रहा है।पत्रकारों पर हमला कारने वालों के ऊपर कोई ठोस कार्यवाही नहीं होने से तस्करों, माफियाओं और भ्रष्ट कर्मचारियों का हौसला गातार बुलंद होते जा रहा है। एक तरफ भूपेश सरकार पत्रकारों की सुरक्षा के लिए पत्रकार सुरक्षा कानून लागू करने की बात कर रही है तो दूसरी ओर लोकतंत्र के चौथे आधार स्तंभ पर प्राणघातक प्रहार हो रहा है। अब सब पत्रकार एक स्वर में बोल रहे हैं की हमें भी सुरक्षा के लिए लायसेंसी हथियार दिया जाए।ताकि अपनी सुरक्षा खुद कर सकें। क्योंकि जिम्मेदार इनकी सुरक्षा करने में पूर्ण रूप से नाकाम साबित हो रहे हैं। वहीं इस घटना को लेकर पत्रकारों ने कड़ी निंदा व्यक्त करते हुए दोषियों के ऊपर कड़ी से कड़ी कार्यवाही की मांग की है।

हमलावरों ने अपना कृत्य छुपाने आजाक थाना में किया शिकायत...जिम्मेदार ले रहे है आरोपियों का पक्ष...
बताना चाहेंगे की घटना की शिकायत के बाद छुरा थाना द्वारा उच्च अधिकारियों के मार्गदर्शन में एफआईआर दायर कर 5 से अधिक लोगों पर मामला दर्ज कर विवेचना में लिया है लेकिन आरोपीगण जांच को प्रभावित करने और अपने आरक्षण का दुरुपयोग करने व अपने कृत्यों को छुपाने तरह-तरह का आरोप लगाकर पुलिस कार्यवाही से बचने फर्जी शिकायत करने पर उतारू हो गए हैं। वहीं आजाक थाना भी बिना पक्ष जाने आरोपियों का पक्ष लेने में लगा है। चिंता का तो मुख्य विषय ये है की कल किस पत्रकार की बारी ?

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